पर्यटन के लिए एतिहासिक स्थल

देश का नवगठित राज्य आपने आप में अनेको खूबिय समेटे है ,यहा पर्यटन के लिए एतिहासिक स्थलों के साथ भगवन राम चन्द्र जी के वन गमन मार्ग के अवशेष ,नदियों की वादिया उदगम स्थल , कल कल करते झरने ,विशाल वन आच्छादित छेत्र ,जंगली जानवरों की फोज,नाग लोक ,कश्मीर की वादियों जेसा अमरकंटक , छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट,पुरातत्व कालीन सिरपुर ,खुजराहो जेसा भोरम देव मंदिर , रामगढ पर्वत HAT (टोपी) की सकल का है। रामगढ भगवान राम एवं महाकवि कालीदास से सम्बन्धित होने के कारण सोध का केन्द्र बना हुआ है, लक्ष्मणगढ ,पहाडी पर शैल चित्रों -सीता लेखन, लोकप्रिय ताला या तालागांव में नदी मनियारी के बैंकों पर देवरानी और ज

स्वास्थ्य पर्यटन

पर्यटन मंत्री कुमारी सैलजा ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को आज सूचित किया कि देश में चिकित्सा पर्यटन के संवर्धन के लिए भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इनमें विदेशी बाजारों में चिकित्सा पर्यटन के संवर्धन, चिकित्सा उपचार के लिए भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों हेतु 'चिकित्सा वीजा' अतिरिक्त श्रेणी शुरू करना, चिकित्सा पर्यटन के ऊपर प्रचार सामग्री तैयार करना और पर्यटन मंत्रालय की वेबसाइट एवं भारत पर्यटन कार्यालयों के माध्यम से चिकित्सा पर्यटन पर जानकारी का प्रसार करने हेतु चिकित्साबेहतर स्वास्थ्य पर्यटन सेवा प्रदाताओं और चिकित्साबेहतर स्वास्थ्य पर्यटन फैसिलिटेटर्स को बाजार विकास सहायता यो

संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन

संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन की कार्यकारी परिषद में भारत को फिर से चुना गया
संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन की कार्यकारी परिषद में भारत को फिर से चार वर्ष के लिए चुना गया है। 05 से 08 अक्तूबर, 2009 को अस्ताना में आयोजित संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन की महासभा के 18वें सत्र में इसकी घोषणा की गई।

वि‍देशी पर्यटकों का आगमन- आमदनी

अप्रैल 2011 में वि‍देशी पर्यटकों का आगमन और वि‍देशी मुद्रा आमदनी

रामटेकरी की पहाड़ियों पर राम मंदिर

रामटेकरी का पहाड़ आज पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।बिलासपुर जिले के रतनपुर के समीप स्थित रामटेकरी के आसपास का नजारा बहुत ही आकर्षक नजर लगता है। इस पहाड़ के ऊपर से चारों तरफ फैली हरियाली, छोटे-छोटे तालाब पर्यटकों का आकर्षित कर लेते है यहां ग्यारहवीं शताब्दी के आरंभ से कल्चुरियों का शासन था । रतनपुर में सन् 1741 ई. में नागपुर के मराठा भोसलों का शासन था। यहाँ भोसला राजकुमार बिम्बा जी ने यहां शासक बनकर सन् 1758 ई. से 1787 ई. तक राज्य किया। इस मध्य उन्होंने रामटेकरी की पहाड़ियों में राम मंदिर का निर्माण करवाया।

राजीव लोचन महोत्सव

राजिम कुंभ मेला में राजीव लोचन महोत्सव
प्रतिदिन होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
राजिम के त्रिवेणी संगम पर माघ पूर्णिमा 18 फरवरी से शुरू हो रहे राजिम कुंभ मेले के दौरान राजीव लोचन महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। महोत्सव के अन्तर्गत प्रतिदिन शाम छह बजे से त्रिवेणी संगम पर बने मुक्ताकाशी मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। राजीव लोचन महोत्सव 18 फरवरी माघ पूर्णिमा से दो मार्च महाशिवरात्रि तक चलेगा। महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा भी गीत-संगीत और नृत्य के कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।

राजिम कूंभ क्षेत्र- पंचकोसी परिक्रमा

शिवजी की भूमि - चित्रोत्पला गंगा, सोंढूर तथा पैरी इन तीन नदियों के इस त्रिवेणी संगम पर स्थित यह सुप्रसिध्द धार्मिक, पुरातात्विक व सांस्कृतिक क्षेत्र प्रयागराज राजिम के नाम से जाना जाता है । मंदिरों की नगरी के नाम से प्रसिध्द यह तीर्थ क्षेत्र अंचल की जनता के लिए सदैव से ही आस्था का केन्द्र रहा है । यहां के प्रमुख मंदिरों में है राजीव लोचन मंदिर है, इसमें भगवान विष्णु की चतुर्भुज श्यामवर्ण मूर्ति हाथों में शंख, चंद्र, गदा पद्म लिये शोभायमान है जो आगंतुतकों को अनायास ही अपनी ओर आकर्षिक करती है ।

राजिम कुंभ मेला में धर्म अध्यात्म एवं विज्ञानमय वास्तु एवं ज्योतिष सम्मेलन

रायपुर । श्री चक्र महामेरू पीठम दंडी स्वामी सच्चिदानंद तीर्थ जी महाराज के राजिम कुंभ मेला परिसर स्थित संत समागम सत्संग शिविर के सभा मंडप में धर्म अध्यात्म एवं विज्ञानमय वास्तु एवं ज्योतिष सम्मेलन का पुन्जवाद स्वामी गुरूशरण जी महाराज पंडोखर सरकार के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ । इस महासम्मेलन में सर्वश्री डॉ. सत्य विश्वास अध्यक्ष एशियन एस्ट्रोलाजर्स कांमग्रेस पं. कीर्तिभषण पांडेय, भारतीय वैदिक वास्तु एवं ज्योतिष अनुसंधान परिषद महामंडलेश्वर स्वामी राजेश्वरानंद महंत एवं प्रमुख धन्वतरी अखाड़ा रायपुर महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद आचार्य डॉ. अनंतधर शर्मा, आचार्य डॉ.

राजिम कुंभ महापर्व 2011 : साधु-संतों का आशीर्वाद

राजिम कुंभ महापर्व 2011 : विधानसभा अध्यक्ष सहित मंत्रियों, संसदीय सचिवों और विधायकों ने साधु-संतों का आशीर्वाद किया
राजिम के त्रिवेणी संगम पर आयोजित राजिम कुंभ महापर्व में कल सोमवार की शाम विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौषिक सहित प्रदेष शासन अनेक मंत्रियों, संसदीय सचिवों और विधायकों में संत समागम में शामिल होकर साधु-संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। संगम तट पर बने मुख्य मंच के कार्यक्रम के बाद सभी अतिथियों ने कुलेश्वर मंदिर के नजदीक बनी साधु-संतों की कुटियों में पहुंच कर दर्शन लाभ लिया।

मां गंगा

ननद जो सब छोड़ मायके की देहरी पर बैठी है। सबकी जरूरतें पूरी करती-करती अपनी जरूरतें तो भूल ही गई। पूरा दिन घर के काम, सास की गालियां, ननद के ताने और शाम होते ही पति की मार। हर रात लगता शायद कल का सूरज शायद मेरी जिंदगी में भी सुबह ले आए, पर हर दिन वही निराशा। समय का पहिया यूं ही चलता रहा, दो बच्चे हो गए, पर हालात न बदले। याद आया रात भी ये पीकर आए और छोटीे-सी बात पर लड़ने लगे। हमेशा की तरह सास-ननद भी इन्हीं का साथ देने लगी, मुजरिमों की तरह मुझ्ो कठधरे में खड़ा कर दिया। गलती क्या थी कि खाना गरम नहीं हुआ इसी बात पर बांह पकड़ घर से बाहर निकाल दिया। रोते-रोते कितना चली, पता ही नहीं चला, सामने बस आ

Pages

Subscribe to Chhattisgarh Tourism RSS