संस्कृति

केन्द्रीय पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा से श्री बघेल की मुलाकात

डॉ महेश शर्मा,राकेश चतुर्वेदी,दयालदास बघेल

छत्तीसगढ़ सरकार संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री दयालदास बघेल ने नई दिल्ली में केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा से सौजन्य मुलाकात की। केन्द्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री को छत्तीसगढ़ में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य में प्रस्तावित दो प्रमुख पर्यटन परिपथ (टूरिस्ट सर्किट) के बारे में भी डॉ. शर्मा से विचार-विमर्श किया। इनमें से एक परिपथ जगदलपुर-चित्रकोट-बारसूर-दन्तेवाड़ा के लिए और दूसरा रतनपुर से मैनपाट के लिए प्रस्तावित है।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का विकास

आदिवासी घोटूल,आदिवासी,घोटूल,

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री दयालदास बघेल ने कहा है कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को और विकसित किया जाएगा, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर विभागीय काम-काज की समीक्षा की।छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इसे बढ़ावा देने हर संभव प्रयास किया जाएगा। पर्यटन के क्षेत्र में नये कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी और पर्यटकों को आकर्षित करने के भी उपाय किए जाएंगे।

महाशिवरात्रि तक राजिम कुंभ मेला

राज्य सरकार ने माघ पूर्णिमा के अवसर पर महानदी के तट पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले राजिम कुंभ मेले की तैयारियों शुरू कर दी है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में आज राजिम के त्रिवेणी संगम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की संयुक्त बैठक में समारोह की रूप-रेखा और विचार-विमर्श किया गया।

पर्यटन प्रोत्साहन कार्यक्रम

भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय अपनी 'अतुलनीय भारत' अभियान के अंतर्गत हर वर्ष अंतर्राष्ट्री य बाजार में प्रिंट, इलेक्ट्रो निक, ऑनलाइन और आउटडोर मीडिया अभियान के अंतर्गत प्रचार सामग्री जारी करता है। इसका उद्देश्य0 देश के विभिन्नअ पर्यटन लक्ष्योंा और उत्पा।दों को प्रोत्सा हित करना और भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्याल बढ़ाना है। इसके अतिरिक्त विदेश स्थित भारतीय पर्यटन कार्यालयों के जरिए अनेक प्रोत्साहन गतिविधियां भी संचालित की जाती हैं ताकि भारतीय पर्यटन की संभावनाओं को उजागर किया जा सके और देश में पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। इन गतिविधियों में मेलों और प्रदर्शनियों में हिस्सा लेना, रोड

राजिम कुंभ ईश्वर की कृपा और संतों के आशीर्वाद

संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल

संत समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ नया राज्य है, लेकिन संत महात्माओं के आशीर्वाद से मात्र 12 वर्षो में ही इस राज्य ने देश के सबसे तेज विकसित हो रहे राज्य के रूप में अपनी पहचान बनायी है। डॉ.

नारायणपुर गोंडी संस्कृति का केन्द्र

नारायणपुर क्षेत्र से आए ग्रामीणों के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री से नारायणपुर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मोटल बनवाने का आग्रह किया। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि नारायणपुर गोंडी संस्कृति का केन्द्र है। यह अबूझमाड़ का प्रवेश द्वारा है। यह बस्तर की परम्परागत लोक कला और हस्तशिल्प का भी एक महत्वपूर्ण केन्द्र है। टेराकोटा, लकड़ी, बांस शिल्प जैसी कलाकृतियों का निर्माण स्थानीय कलाकारों द्वारा किया जाता है।

छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम की कर्मभूमि

छत्तीसगढ़ की संस्कृति सम्पूर्ण भारत में अपना बहुत ही ख़ास महत्त्व रखती है। भारत के हृदय-स्थल पर स्थित छत्तीसगढ़, जो भगवान श्रीराम की कर्मभूमि रही है, प्राचीन कला, सभ्यता, संस्कृति, इतिहास और पुरातत्त्व की दृष्टि से अत्यंत संपन्न है। यहाँ ऐसे भी प्रमाण मिले हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि अयोध्या के राजा श्रीराम की माता कौशल्या छत्तीसगढ़ की ही थी। बस्तर का 'दशहरा', रायगढ़ का 'गणेशोत्सव' तथा बिलासपुर का 'राउत मढ़ई' ऐसे ही उत्सव हैं, जिनकी अपनी एक बहुत-ही विशिष्ट पहचान है'छत्तीसगढ़ की संस्कृति' के अंतर्गत अंचल के प्रसिद्ध उत्सव, नृत्य, संगीत, मेला-मड़ई तथा लोक शिल्प आदि शामिल हैं।यहाँ की पारंप

छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम की कर्मभूमि

छत्तीसगढ़ की संस्कृति सम्पूर्ण भारत में अपना बहुत ही ख़ास महत्त्व रखती है। भारत के हृदय-स्थल पर स्थित छत्तीसगढ़, जो भगवान श्रीराम की कर्मभूमि रही है, प्राचीन कला, सभ्यता, संस्कृति, इतिहास और पुरातत्त्व की दृष्टि से अत्यंत संपन्न है। यहाँ ऐसे भी प्रमाण मिले हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि अयोध्या के राजा श्रीराम की माता कौशल्या छत्तीसगढ़ की ही थी। बस्तर का 'दशहरा', रायगढ़ का 'गणेशोत्सव' तथा बिलासपुर का 'राउत मढ़ई' ऐसे ही उत्सव हैं, जिनकी अपनी एक बहुत-ही विशिष्ट पहचान है'छत्तीसगढ़ की संस्कृति' के अंतर्गत अंचल के प्रसिद्ध उत्सव, नृत्य, संगीत, मेला-मड़ई तथा लोक शिल्प आदि शामिल हैं।यहाँ की पारंप

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