राजिम कुंभ का 12वां साल - राजिम महाकुंभ (कल्प)

छत्तीगढ़ प्रदेश में राजिम एक विशेष महत्व रखने वाला एक छोटा सा शहर है। प्राचीन समय से राजिम अपने पुरातत्वो और प्राचीन सभ्यताओ के लिए प्रसिद्द है। राजिम में प्रति वर्ष होने वाले मेले को राजिम कुम्भ के नाम पुकारा जाता है। माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक पंद्रह दिनों का मेला यहाँ लगता है। राजिम में तीन नदियों का संगम है इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है। यहाँ महानदी, पैरी नदी तथा सोढुर नदी है, राजिम के संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव जी विराजमान है।राजिम के मेले की परम्परा को २००५ से कुम्भ के रूप में मनाया जाने लगा है। कुम्भ की शुरुआत कल्पवाश से होती है। यहाँ हजारो साधू संतो का आगमन होता है। नागा साधू, संत द्वारा शाही स्नान और संत समागम का लाभ राज्यों से लाखो की संख्या में श्रद्धालु लोग लेते है और भगवान श्री राजीव लोचन तथा श्री कुलेश्वर नाथ महादेव जी के दर्शन करते है। लोगो में मान्यता है की भनवान जगन्नाथपुरी जी की यात्रा तब तक पूरी नही मानी जाती जब तक भगवान श्री राजीव लोचन तथा श्री_कुलेश्वर नाथ के दर्शन नहीं कर लिए जाये इस लिए राजिम कुम्भ का प्रदेश में अपना एक विशेष महत्व है। यह आयोजन में शासन प्रसाशन अपनी कड़ी मेहनत करता है और धर्मस्व ,पर्यटन ,संकृति विभाग लाखो रुपये का आबंटन करते है
इस वर्ष 12 वे वर्ष के अवसर पर इसे कल्प का नाम दिया गया है इस वर्ष राजिम महाकुंभ माघीपुन्नी दस फरवरी से शुरू होकर महाशिवरात्रि 24 फरवरी तक चलेगा। 18 फरवरी से संत-समागम शुरू होगा। महाकुंभ में 13 अखाड़ों के शामिल होने की सहमति मिल गई है। महाकुंभ के शुभारंभ समारोह में प्रसिद्ध प्रवचनकार सुधांशु जी महाराज शामिल होंगे। 14 फरवरी से 22 फरवरी तक रमेश भाई ओझा का प्रवचन होगा। इसी प्रकार 18 फरवरी से संत श्री सतपाल महाराज का प्रवचन की अमृतधारा संगम पर बहेगी।