राजिम कुंभ ईश्वर की कृपा और संतों के आशीर्वाद

संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल

संत समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ नया राज्य है, लेकिन संत महात्माओं के आशीर्वाद से मात्र 12 वर्षो में ही इस राज्य ने देश के सबसे तेज विकसित हो रहे राज्य के रूप में अपनी पहचान बनायी है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हम सब छत्तीसगढ़ के विकास के लिए काम करते हैं, लेकिन हमारे कार्यो को सफलता संत महात्माओं के आशीर्वाद और प्रभु के कृपा से ही मिल पाती है। छत्तीसगढ़ को माता कौशिल्या सहित सभी संतों का आशीर्वाद प्राप्त है। प्रभु की कृपा से छत्तीसगढ़ में विगत नौ वर्षो में कोई अकाल नहीं पड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजिम का यह कुंभ भी ईश्वर की कृपा और संतों के आशीर्वाद से हर साल सफलतापूर्वक आयोजित हो रहा है। वर्ष 2017 में जब राजिम कुंभ के 12 वर्ष पूर्ण होंगे, उस समय हम सब इसे और भी भव्य तथा अलौकिक स्वरूप में आयोजित करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पावन त्रिवेणी संगम पर राजिम कुंभ में आयोजित संत समागम में श्रध्दालुओं की सुविधा के लिए भक्त माता राजिम के नाम पर बनने वाली विशाल धर्मशाला का निर्माण एक करोड़ रूपए की लागत से किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस धर्मशाला का भूमि पूजन किया ,डॉ. सिंह ने आज राजिम कुंभ में लोकार्पित 20 करोड़ रूपए की लागत वाले एनीकट का उल्लेख करते हुए इसके निर्माण के लिए जल संसाधन मंत्री श्री रामविचार नेताम सहित उनके विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने राजिम कुंभ के आयोजन में संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू सहित अन्य सभी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा किए जा रहे परिश्रम की भी प्रशंसा की।

संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि साधु-संतों के आशीर्वाद और राज्य सरकार के सार्थक प्रयासों से राजिम में माघ पूर्णिमा पर आयोजित मेले का आकार बढ़कर एक विशाल कुंभ का स्वरूप ले चुका है। छत्तीसगढ़ ही नहीं वरन् देश के विभिन्न प्रान्तों के लोग यहां आकर भगवान राजीव लोचन, कुलेश्वर महादेव आदि देवी-देवताओं का दर्शन लाभ लेकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने गौ-हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया है और गौवंशीय पशुओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए कामधेनु विश्वविद्यालय बनाया गया है।